नई दिल्ली। देश में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी पड़ने से 27 जून तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) का कहना है कि इस बार अल नीनो के साथ इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole- IOD) भी न्यूट्रल स्थिति में है, जिससे मानसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना कम हो गई है. कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है. हालांकि IMD को उम्मीद है कि अगले महीने मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने पर कुछ सुधार संभव है।
एक रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सूखे की आधिकारिक घोषणा जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही तो कई राज्यों में हालात गंभीर हो सकते हैं. अल नीनो की सक्रियता पहले से ही मानसून को कमजोर कर रही है और न्यूट्रल IOD के कारण उसे अतिरिक्त ताकत नहीं मिल रही. यही वजह है कि वैज्ञानिक पूरे मानसून सीजन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले कुछ सप्ताह खेती और जल संसाधनों दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले दो बड़े कारक अल नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) हैं. अल नीनो सक्रिय (El Nino Affect) होने पर सामान्य तौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है. यदि उसी समय पॉजिटिव IOD मौजूद हो तो वह बारिश की कमी की भरपाई करने में मदद करता है. लेकिन इस बार हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD की स्थिति बनी हुई है. इसका मतलब है कि यह मानसून को न तो मजबूत करेगा और न ही कमजोर, जिससे अल नीनो का असर ज्यादा प्रभावी दिखाई दे सकता है।
1 जून से 27 जून के बीच देशभर में 43 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. कई राज्यों में हालात और ज्यादा खराब हैं. मेघालय में 82 प्रतिशत, गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत तक बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई है. मध्य प्रदेश में भी 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो खेती के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।
देश के चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही है. मध्य भारत में सबसे अधिक 57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. इसके बाद पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में मानसून पहुंचने के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।
दिल्ली में भी उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शनिवार को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन अधिक आर्द्रता के कारण ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्तर भारत में उमस और गर्मी का असर कुछ दिन और बना रह सकता है।
मौसम विभाग का कहना है कि अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी है और जुलाई में पूरे देश में मानसून के फैलने के बाद बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना है. हालांकि अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए विभाग ने पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश ही तय करेगी कि यह मानसून सामान्य रहेगा या फिर देश को सूखे जैसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
फिलहाल वैज्ञानिक लगातार मौसम के वैश्विक संकेतकों पर नजर रख रहे हैं. यदि अल नीनो लंबे समय तक प्रभावी रहा और IOD न्यूट्रल ही बना रहा तो कई राज्यों में खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि अंतिम तस्वीर पूरे मानसून सीजन के समाप्त होने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल किसानों और आम लोगों दोनों की नजर अब जुलाई की बारिश पर टिकी हुई है।
