नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।
इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।
चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।
CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग
कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।
अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना
7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी
इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।
CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।
कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।
ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
