शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।
इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।
कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
