मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के जरिए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया और इसे आगे भारत सरकार के पास भेजने की बात भी शामिल थी। हालांकि, प्रस्ताव की प्रस्तावना में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ ने विवाद खड़ा कर दिया।
भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के पुराने संदर्भ को शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सदन में स्वायत्तता से संबंधित विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते कई विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के दौरान प्रस्ताव की प्रतियां फाड़कर सदन के बीच में फेंके जाने की भी घटना सामने आई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने सदन के बीच से एक कुर्सी उठाने का प्रयास किया। मार्शलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और बाद में उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। लेकिन लगातार जारी नारेबाजी और हंगामे के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद अध्यक्ष ने पहले करीब 30 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके बाद सदन की बैठक सोमवार तक स्थगित कर दी गई।
इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को लेकर भी सदन में विरोध जताया था। इस दौरान नारेबाजी हुई और सदन का माहौल पहले से ही गरम रहा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे, उन्होंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, उस समय प्रधानमंत्री ने इसे सामान्य वादा नहीं बल्कि ‘मोदी की गारंटी’ बताया था। उमर ने सवाल उठाया कि यदि यह गारंटी थी, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।
जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। विधानसभा में शुक्रवार की कार्यवाही ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया। फिलहाल प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और सदन की अगली कार्रवाई सोमवार को होने की संभावना है।
