सरकार के अनुसार वर्तमान में NEET-UG पारंपरिक पेन और पेपर मोड में आयोजित की जाती है, लेकिन भविष्य में इसे कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने के विकल्प का भी अध्ययन किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर ही लागू किया जाएगा। इस उद्देश्य से गठित टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित मंत्रालयों, परीक्षा एजेंसियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही किसी नए प्रारूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी आश्वस्त किया है कि यदि परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव किया जाता है तो उसे अचानक लागू नहीं किया जाएगा। छात्रों को पर्याप्त समय पहले नई व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे उसी के अनुरूप अपनी तैयारी कर सकें। इससे अभ्यर्थियों को नए प्रारूप को समझने और उसके अनुसार अभ्यास करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
परीक्षा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भी कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इनमें बायोमेट्रिक सत्यापन, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली, डिजिटल निगरानी और अन्य तकनीकी सुरक्षा उपाय शामिल हो सकते हैं। हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विभिन्न प्रश्नों और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार परीक्षा संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रही है।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा और बहु-चरणीय प्रणाली लागू होती है तो इससे परीक्षा संचालन अधिक सुव्यवस्थित हो सकता है। हालांकि इसके लिए देशभर में तकनीकी ढांचे, परीक्षा केंद्रों की क्षमता और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार करने और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
