राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री मलप्पुरम जिले के पोन्नानी क्षेत्र में यूथ लीग के एक नेता के घर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ए.ए. रहीम ने कहा कि जब राज्य के कई जिले प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं और हजारों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री की उपस्थिति ऐसे कार्यक्रम में उचित संदेश नहीं देती।
रहीम ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी जिम्मेदारी राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी समन्वय करना है। उनके अनुसार ऐसे समय में प्रशासनिक नेतृत्व का सक्रिय रूप से मैदान में दिखाई देना लोगों के बीच भरोसा पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा की गंभीर स्थिति के दौरान निजी कार्यक्रमों में शामिल होना जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि जब पूरा राज्य भारी बारिश, बाढ़ और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा हो, तब सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और बचाव अभियान को तेज करने पर होना चाहिए। रहीम ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे अन्य सभी गतिविधियों को पीछे छोड़कर राज्य में चल रहे राहत कार्यों की निगरानी स्वयं करें ताकि प्रभावित लोगों तक सहायता तेजी से पहुंच सके।
दूसरी ओर, केरल में लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।
अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि छह अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न जिलों में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 1400 से अधिक लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपाय भी लागू किए जाएंगे। इस बीच, आपदा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक विवाद भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
