कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने एक खिलौना बंदर को प्रदर्शन का हिस्सा बनाया। इस दौरान सांसदों ने नारे लगाते हुए सरकार पर सदन के भीतर विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान 56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर जैसे नारे लगाए गए।
विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन संसद के मॉनसून सत्र में लगातार बने रहे राजनीतिक तनाव के बीच हुआ। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग करता रहा, जबकि सदन की कार्यवाही कई मौकों पर व्यवधान के कारण प्रभावित हुई।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सत्र के समापन के बाद सरकार पर विपक्ष और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी-बड़ी बातें की गईं, लेकिन छात्रों के मुद्दों, चंदे से जुड़े सवालों और लोगों की आस्था से जुड़े विषयों पर सदन में अपेक्षित चर्चा नहीं हुई।
पप्पू यादव ने बच्चों से जुड़े मामलों में लाठी और गोली चलने के आरोपों का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए था। उनके अनुसार, संसद में चर्चा की जिम्मेदारी सरकार की है और विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना तथा जवाब मांगना है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचती रही। विपक्ष की ओर से लगातार मुद्दे उठाए जाने के बावजूद सदन में उन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनका जवाब दे।
राजद सांसद मनोज झा ने भी संसद की कार्यवाही में बार-बार हो रहे व्यवधान को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी किसकी थी।
मनोज झा ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी जवाबदेही का सवाल उठाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में किसी घटना की जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने इस मुद्दे को सीधा और स्पष्ट सवाल बताते हुए सरकार से जवाब की अपेक्षा जताई।
मॉनसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्थगित हो गई, जबकि राज्यसभा की कार्यवाही भी बाद में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही संसद का यह सत्र समाप्त हो गया।
सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए। विपक्ष ने जहां विभिन्न मामलों पर तत्काल चर्चा और सरकार की जवाबदेही की मांग की, वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गए।
अंतिम दिन संसद परिसर में हुआ खिलौना बंदर वाला प्रदर्शन विपक्ष की सरकार के खिलाफ राजनीतिक रणनीति का एक प्रतीकात्मक हिस्सा रहा। प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को सदन के भीतर उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए और महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा से बचना नहीं चाहिए।
