केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। दोनों मंत्रियों के बीच हैदराबाद को चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे से जोड़ने वाली प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। बैठक के बाद रेड्डी ने बताया कि रेल मंत्री ने साफ किया है कि संबंधित राज्य सरकारों को जमीन अधिग्रहण के संबंध में कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है।
रेड्डी के अनुसार, रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के मौजूदा चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का अधिग्रहण करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि तीनों प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए अलाइनमेंट संबंधी अध्ययन जारी है। मार्ग का निर्धारण पूरा होने के बाद संबंधित राज्य सरकारों और किसानों को इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। इस स्पष्टीकरण से परियोजना के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेलंगाना में रेल कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिशों को लेकर किसानों का विरोध सामने आया है। हैदराबाद के बाहरी इलाकों में किसान जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के संबंध में मौजूदा स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अभी जमीन अधिग्रहण के लिए संबंधित राज्य सरकारों को कोई मांग नहीं भेजी गई है। फिलहाल परियोजनाओं का मार्ग तय करने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। दक्षिण मध्य रेलवे की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में अश्विनी वैष्णव और जी. किशन रेड्डी के बीच हैदराबाद को चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल मार्गों पर विस्तार से चर्चा होने की जानकारी दी गई थी। मौजूदा स्पष्टीकरण में केंद्र ने दोहराया है कि तीनों कॉरिडोर की अलाइनमेंट स्टडी पूरी होने और मार्ग निर्धारित किए जाने के बाद ही संबंधित पक्षों के साथ जानकारी साझा की जाएगी।
रेलवे के बजट खर्च और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के संबंध में भी जानकारी दी गई थी। अगस्त में सरकार ने बताया था कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित बजट में से जुलाई तक भारतीय रेलवे 1,14,973 करोड़ रुपये खर्च कर चुका था। यह राशि 2,93,030 करोड़ रुपये के कुल बजट का लगभग 39 प्रतिशत थी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर खर्च 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया। स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच के संबंध में उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक इसके संस्करण 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका था। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे अधिक यातायात वाले रेल कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।
