घटना 3 जून की सुबह सामने आई थी, जब होटल के बेसमेंट में संचालित एक रेस्टोरेंट क्षेत्र में अचानक आग लग गई। शुरुआती आग कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में फैल गई और होटल के कई हिस्से धुएं तथा लपटों की चपेट में आ गए। आग लगने के समय होटल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 11 विदेशी और 10 भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। मृत विदेशी नागरिकों में अफ्रीकी देशों और तुर्कमेनिस्तान के लोग भी शामिल थे।
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि होटल परिसर में मूल संरचना से अधिक कमरे तैयार किए गए थे। पूछताछ के दौरान होटल मालिक ने स्वीकार किया कि कारोबार विस्तार के उद्देश्य से भवन में अतिरिक्त कमरे जोड़े गए थे। हालांकि उसने दावा किया कि होटल के संचालन, प्रबंधन और वित्तीय गतिविधियों की जिम्मेदारी अन्य लोगों को सौंप रखी गई थी। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि होटल में किए गए निर्माण और संशोधन संबंधित नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
जांच एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से भवन की संरचना और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार होटल में बाहर निकलने के लिए सीमित मार्ग उपलब्ध था, जिससे आग लगने के बाद कई लोग अंदर फंस गए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक भवन में पर्याप्त आपात निकास मार्ग और अग्नि सुरक्षा उपाय अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है कि होटल में सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था।
हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। इस जांच का उद्देश्य आग लगने के वास्तविक कारणों, संभावित लापरवाही और नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है।
घटनास्थल के आसपास संचालित अन्य होटल और होमस्टे भी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार संबंधित होटल समूह के कई प्रतिष्ठान उसी इलाके में संचालित हो रहे हैं, जहां देश-विदेश से आने वाले लोग ठहरते हैं। ऐसे में प्रशासन सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
मालवीय नगर अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा केवल तकनीकी कारणों से हुआ या फिर इसके पीछे प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर की गंभीर लापरवाही भी जिम्मेदार थी। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग सभी पहलुओं की जांच में जुटे हुए हैं।
