जानकारी के अनुसार हुमायूं कबीर को पहले जान से मारने की कथित धमकियों के बाद विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। सुरक्षा को लेकर उन्होंने न्यायालय का भी रुख किया था, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय सुरक्षा कवर प्रदान किया गया था। उस समय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संभावित खतरे का आकलन करते हुए Y+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। हालांकि हाल ही में की गई नई समीक्षा के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश की, जिसके आधार पर यह सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया गया।
सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद हुमायूं कबीर ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। उन्होंने कहा कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों और सरकार से संपर्क करेंगे। उनका मानना है कि उन्हें अभी भी सुरक्षा की आवश्यकता है और इस संबंध में वह आगे आवश्यक कदम उठाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सुरक्षा श्रेणी में बदलाव का निर्णय आमतौर पर खतरे के स्तर, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और विभिन्न प्रशासनिक मूल्यांकन के आधार पर लिया जाता है।
इसी समीक्षा प्रक्रिया के तहत पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की सुरक्षा श्रेणी में भी बदलाव किया गया है। उन्हें पिछले कुछ वर्षों से उच्च स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही थी। पहले उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, जिसे बाद में बढ़ाकर Z श्रेणी कर दिया गया था। सुरक्षा बढ़ने के बाद उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या में भी वृद्धि की गई थी। अब नई समीक्षा के बाद उनकी सुरक्षा श्रेणी को फिर से घटाकर Y कर दिया गया है। हालांकि उनके लिए सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है और आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल पहले की तरह जारी रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार हालिया सुरक्षा समीक्षा में कई अन्य व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी पुनर्मूल्यांकन किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं, सार्वजनिक हस्तियों और अन्य संरक्षित व्यक्तियों के खतरे के स्तर का आकलन करती हैं। इसी प्रक्रिया के तहत यह तय किया जाता है कि किसी व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि खतरे का स्तर कम आंका जाता है तो सुरक्षा श्रेणी में कमी की जा सकती है, जबकि जोखिम बढ़ने पर सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था एक गतिशील प्रक्रिया है और यह पूरी तरह सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट तथा परिस्थितियों पर आधारित होती है। सुरक्षा कवर का उद्देश्य किसी व्यक्ति को संभावित खतरों से बचाना होता है, न कि इसे स्थायी सुविधा के रूप में देखा जाता है। इसलिए समय-समय पर होने वाली समीक्षा के आधार पर सुरक्षा में बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माने जाते हैं।
फिलहाल हुमायूं कबीर और सौरव गांगुली की सुरक्षा श्रेणियों में किए गए बदलावों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। आने वाले दिनों में यदि सुरक्षा एजेंसियों को कोई नया इनपुट प्राप्त होता है तो परिस्थितियों के अनुसार आगे भी समीक्षा और आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि सभी फैसले सुरक्षा मूल्यांकन और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार ही किए गए हैं।
