वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार से सवाल पूछना उसका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं। सरकार की नीतियों की आलोचना करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान देश के नागरिकों की मेहनत और आर्थिक उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार से असहमति रखने का पूरा अधिकार है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में आम नागरिकों के योगदान को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
सीतारमण ने भारत की आर्थिक स्थिति के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026-27 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर में 12.1 प्रतिशत का विस्तार देखने को मिला है। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 700 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचना भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
वित्त मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े केवल कागजों पर दर्ज उपलब्धियां नहीं हैं बल्कि इसके पीछे देश के करोड़ों नागरिकों की कड़ी मेहनत और उनकी महत्वाकांक्षाएं हैं। भारत के लोग अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में भी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और यह देश की क्षमता को दर्शाता है।
राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीतारमण ने कांग्रेस में मौजूद अर्थशास्त्रियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक आंकड़ों और वास्तविक तथ्यों को समझते हैं। इसलिए मजबूत विकास दर और अन्य सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत कहना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत हो सकती है और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं लेकिन इससे देश की पूरी आर्थिक प्रगति को नकारा नहीं जा सकता।
सीतारमण ने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार और निवेश को आसान बनाने के लिए 1000 से अधिक कानूनों को हटाया है और लगभग 40000 नियमों को सरल बनाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग तथा उद्योग और व्यापार जगत के साथ लगातार संवाद को भी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने भरोसा जताया कि पहली तिमाही का मजबूत प्रदर्शन पूरे वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाली तिमाहियों में भी भारत की विकास गति बनाए रखने की उम्मीद है। जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से होने वाली बातचीत में भी भारत की आर्थिक संभावनाओं और निवेश अवसरों पर जोर दिया जा रहा है। सीतारमण के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आर्थिक आंकड़ों और विकास के मुद्दे पर राजनीतिक बहस के बीच देश की प्रगति को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
