साल 2000 में कोटला गांव के चार लोग एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। तेज राम, मुन्नी लाल, सुरजीत सिंह और सुरजीत का आठ साल का बेटा कालू एक वैन में सवार थे। यह वैन तेज राम की थी, जिसे उन्होंने हाल ही में जमीन बेचकर खरीदा था। लेकिन उस रात घर लौटते समय चारों लोग अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई सुराग मिला और न ही वैन का पता चल सका। यह मामला धीरे-धीरे एक रहस्यमयी गुमशुदगी में बदल गया, जिसने पूरे क्षेत्र को लंबे समय तक बेचैन रखा।
परिजनों ने वर्षों तक खोज जारी रखी। खेत बिके, आर्थिक संसाधन खत्म हुए, निजी स्तर पर गोताखोरों की मदद ली गई और नहरों की तलाशी तक करवाई गई, लेकिन हर प्रयास नाकाम रहा। समय के साथ उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं, लेकिन सवाल वही बना रहा कि आखिर उस रात हुआ क्या था।
हाल ही में एक अन्य मामले की जांच के दौरान जब गोताखोर भाखड़ा नहर में उतरे, तो तलाशी अभियान के दौरान उन्हें पानी की गहराई में एक पुरानी वैन दिखाई दी। वैन को बाहर निकाला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। वाहन के भीतर मानव कंकाल, पुराने कपड़े और कुछ निजी सामान बरामद हुए, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह वही वाहन है जो 26 साल पहले लापता हुआ था।
प्रारंभिक जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रात के समय दृश्यता कम होने के कारण वैन अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई होगी, और अंदर बैठे लोग बाहर निकलने में असमर्थ रहे होंगे। तेज बहाव और गहरी जलधारा के कारण वाहन वर्षों तक पानी के भीतर छिपा रहा और किसी को इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में शोक और सन्नाटा फैल गया है। जिस परिवार ने इतने वर्षों तक अपने परिजनों की वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, उन्हें अब 26 साल बाद यह कठोर सत्य मिला है कि उनका इंतजार कभी पूरा नहीं हो सकता। गांव में लोग इस घटना को एक ऐसे Cold Case के रूप में देख रहे हैं, जिसने समय के साथ अपनी परतें खोली हैं लेकिन साथ ही कई सवाल भी छोड़ दिए हैं। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि कुछ रहस्य समय के साथ दबते नहीं, बल्कि और अधिक गहरे होकर किसी दिन अचानक सामने आ ही जाते हैं।
