राज्य सरकार के अनुसार इसी अवधि में गुजरात ने 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का उत्पादन भी दर्ज किया, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार किए गए निवेश, नई नीतियों और नवीकरणीय परियोजनाओं के विस्तार से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हुई है। इसका सीधा प्रभाव कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में सामने आया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफल रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन कटौती दर्ज होना राज्य की हरित विकास रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास लगातार मजबूत हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का व्यापक उपयोग कोयला तथा अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत को कम करता है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन घटता है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। स्वच्छ ऊर्जा का बढ़ता उपयोग जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव केवल जलवायु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, मौसम और प्राकृतिक संसाधनों से भी होता है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग, असामान्य तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। वहीं स्वच्छ ऊर्जा के अधिक उपयोग से वायु गुणवत्ता में सुधार आता है और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल भी लागू की हैं। ‘इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026’, ‘ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी’ और ‘गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी’ जैसी योजनाओं ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति दी है। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग की निगरानी में विभिन्न सरकारी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से राज्य के बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
गुजरात ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि यह रोडमैप न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ स्रोतों से पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राज्य की यह उपलब्धि देश में हरित विकास के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।
