विधायकों की संख्या के आधार पर निगमों का बंटवारा
बैठक में तय हुआ कि सरकारी निगमों में हिस्सेदारी महायुति के घटक दलों की विधानसभा में संख्या के आधार पर होगी। गठबंधन में सबसे ज्यादा विधायक बीजेपी के हैं, इसलिए निगमों में उसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एनसीपी को हिस्सेदारी मिलेगी।
सरकारी निगमों को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। ए कैटेगरी में सबसे महत्वपूर्ण निगम रखे जाएंगे। इनके अध्यक्षों और सदस्यों के नाम जल्द तय कर सरकार को भेजे जाएंगे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए हर मंगलवार बैठक होगी और सरकार का लक्ष्य एक महीने के भीतर सभी विवादों का समाधान करना है।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर बीजेपी का जवाब
बैठक के बाद बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को बड़ा जनादेश दिया है और 235 विधायक एनडीए सरकार के साथ हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का कोई आधार नहीं है।
बावनकुले ने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष मुख्यमंत्री फडणवीस के मजबूत नेतृत्व से परेशान है।
DPDC में भी हिस्सेदारी का फॉर्मूला
बैठक में जिला योजना विकास समिति (DPDC) से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन क्षेत्रों में, जहां महायुति के अलग-अलग दलों के विधायक हैं, सत्ताधारी दलों के विधायकों को 60 प्रतिशत सदस्यों की नियुक्ति और फंड पर नियंत्रण मिलेगा। संबंधित पालक मंत्री को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाएगी, जबकि छोटे सहयोगी दलों के लिए 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रावधान होगा।
तीनों दलों के प्रमुख नेता रहे मौजूद
बैठक में बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रशेखर बावनकुले शामिल हुए। शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई और दादा भुसे मौजूद रहे। वहीं एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके ने बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक के बाद महायुति के भीतर चल रहे मतभेदों को कम करने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। अब निगाहें सरकारी निगमों में होने वाली नियुक्तियों पर हैं। सरकार जल्द ही इन नियुक्तियों की घोषणा कर सकती है।
