रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी संपर्क का सीमा की स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई है। इसमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन और भारत-चीन सीमा से संबंधित स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रयासों से उत्तरी सीमा पर स्थिरता लाने में मदद मिली है।
यह घटनाक्रम 2024 में दोनों देशों के बीच हुई डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चीन ने अब भारतीय पक्ष की डि-एस्केलेशन से जुड़ी शर्त को भी स्वीकार किया है। डि-एस्केलेशन के तहत सीमा पर तैनात सैनिकों की संख्या कम की जाती है। हालांकि सैनिकों को पूरी तरह पीछे स्थित बैरकों में भेजने की प्रक्रिया यानी डि-इंडक्शन अभी बाकी है। इसके बाद ही LAC पर 2020 की गलवान घाटी की झड़प से पहले जैसी स्थिति बहाल होने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड में करीब 14 से 15 हजार सैनिक हो सकते हैं। इसमें पैदल सेना के साथ मैकेनाइज्ड कॉलम, बख्तरबंद वाहन, तोपखाना, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन वॉरफेयर से जुड़ी इकाइयां शामिल होती हैं। रिपोर्ट में LAC पर चीन की करीब 10 कंबाइंड ब्रिगेड की तैनाती का उल्लेख किया गया है, जिससे वहां बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों की मौजूदगी का संकेत मिलता है।
हालांकि सीमा पर तैनाती में कमी के बावजूद भारत के लिए चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार PLA के करीब डेढ़ लाख सैनिक भारतीय सीमा के करीब ट्रेनिंग क्षेत्रों में भी तैनात हैं। इन क्षेत्रों से सैनिकों को जरूरत पड़ने पर LAC की ओर तेजी से भेजा जा सकता है। इसी वजह से भारतीय सेना चीन से डि-इंडक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
गलवान घाटी में 2020 की झड़प के समय अकेले पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के करीब एक लाख सैनिक तैनात बताए गए थे। इसके बाद पिछले छह वर्षों में 3488 किलोमीटर लंबी LAC पर चीन की सैन्य तैनाती में कमी आई है।
इसी बीच अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबानसिरी क्षेत्र में पिछले एक महीने से भारत और चीन की सेनाओं के बीच फेस-ऑफ की स्थिति बनी हुई है। गतिरोध दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी बरकरार है।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सीमा पर स्थिरता के लिए जारी संवाद और उच्चस्तरीय संपर्क महत्वपूर्ण रहे हैं। भारत-चीन संबंधों में सैन्य स्तर की बातचीत के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्कों को भी सीमा पर स्थिति सुधारने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
