आमतौर पर किसी राजनीतिक दल के विपक्ष में रहने के दौरान संगठनात्मक प्रयोगों के लिए ज्यादा गुंजाइश होती है। सत्ता में रहते हुए बड़े बदलावों से बचने की प्रवृत्ति रहती है। इसके बावजूद भाजपा ने केंद्र में एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी अपने संगठन में बदलाव की शुरुआत की है। पार्टी के युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी है, लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता अपने स्तर पर बनाए रखी है।
हर दशक में बदलता रहा भाजपा का संगठन
भाजपा के 1980 में गठन के बाद करीब-करीब हर दशक में पार्टी के संगठन में बदलाव देखने को मिले हैं। पिछली सदी के अंतिम दशक में तत्कालीन संगठन प्रमुख लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 से 1995 के बीच बड़ी संख्या में युवाओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। उस दौर में नरेंद्र मोदी भी प्रमुख युवा चेहरों में शामिल थे। 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी संगठन में इसी तरह बदलाव हुए। हालांकि, उस समय वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अधिक प्रभावी थी और वे नई टीमों को नेतृत्व देने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते थे।
इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पार्टी का नेतृत्व युवा है और निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी उसी के हाथों में रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। वरिष्ठ नेता नई टीम को मजबूती देने और जरूरत के मुताबिक सलाह देने की भूमिका में रहेंगे।
अगले साल संघ में भी बड़े बदलाव की संभावना
भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद अब उसकी वैचारिक और संगठनात्मक ताकत के प्रमुख केंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले साल महत्वपूर्ण परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद संघ का फोकस Gen-Z पर बढ़ने की बात कही जा रही है। संघ की ओर से अपने शताब्दी वर्ष के बाद नई पीढ़ी को लेकर संकेत भी दिए गए हैं।
इसका व्यापक असर भाजपा के संगठन पर भी दिखाई दे सकता है। जेन-Z और जेन-अल्फा को लेकर बदलते सामाजिक माहौल के बीच भाजपा और संघ अपने नेतृत्व तथा कार्यकर्ताओं में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं।
हालांकि, संघ प्रमुख को बदलने की कोई चर्चा नहीं है। मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत 2009 से इस पद पर हैं। संघ में सरसंघचालक के चुनाव की व्यवस्था नहीं है। इस पद पर नियुक्ति आम सहमति से होती है। मौजूदा संघ प्रमुख किसी नाम का सुझाव देते हैं तो संगठन के भीतर उस नाम पर सहमति बनाई जा सकती है।
