हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान संदीप पाठक के जाने से हुआ है। उनकी भूमिका सिर्फ एक सांसद की नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की रीढ़ के रूप में देखी जाती थी।
साल 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे चेहरों को राज्यसभा भेजा, तब सबसे ज्यादा चर्चा संदीप पाठक को लेकर हुई थी, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे। लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली थी, जिसे पहचान देते हुए उन्हें उच्च सदन में भेजा गया था।
2016 में पार्टी से जुड़ने वाले संदीप पाठक ने संगठन के भीतर तेजी से अपनी जगह बनाई। उनकी सार्वजनिक उपस्थिति भले कम रही, लेकिन पार्टी की रणनीति और विस्तार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। यही वजह रही कि जब तीन राज्यसभा सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, तो सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक के फैसले से लगा।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल या राघव चड्ढा के जाने की आशंका पहले से थी, लेकिन संदीप पाठक का जाना अप्रत्याशित रहा। वहीं अशोक मित्तल और हरभजन सिंह के रुख में बदलाव को उतना चौंकाने वाला नहीं माना गया।
रणनीति के मास्टरमाइंड थे पाठक
संदीप पाठक को 2022 में संगठन महासचिव बनाया गया था और वे पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। पंजाब में पार्टी की जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना जाता है। इसके अलावा गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। उनकी अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब उनसे मिलने के लिए सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार के साथ संदीप पाठक को ही भेजा गया था।
कैसे जीता भरोसा
संदीप पाठक ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी में दिल्ली डायलॉग कमीशन से की थी, जहां वे आशीष खेतान के साथ काम करते थे। अपनी रणनीतिक समझ और संगठन क्षमता के दम पर उन्होंने जल्दी ही केजरीवाल का भरोसा जीत लिया और पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक के बाद सबसे अहम पद तक पहुंचे।
राघव चड्ढा का जाना क्यों कम असरदार
हालांकि राघव चड्ढा की लोकप्रियता आम जनता में ज्यादा रही है, लेकिन पिछले डेढ़ साल में उनकी सक्रियता पार्टी में कम हो गई थी। वे पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के सदस्य जरूर थे, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग खत्म हो चुकी थी। ऐसे में उनका अलग होना अपेक्षित माना जा रहा था।
