जबलपुर पहुंचे विवेक तन्खा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया, लेकिन कानून का बचाव करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की बनी रही। तन्खा के मुताबिक, वर्तमान सरकार को अदालत में इस व्यवस्था के समर्थन में पर्याप्त तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिए थे।
तन्खा ने हाईकोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त और ठोस आंकड़े पेश नहीं किए जाने के कारण आरक्षण के पक्ष को मजबूती से रखने में कठिनाई हुई। उनका मानना है कि यदि अदालत के सामने समय रहते जरूरी आंकड़े रखे जाते, तो मामले की स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, यह उनका आकलन है और अदालत के निर्णय का अंतिम आधार संबंधित कानूनी तथ्यों तथा न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करता है।
आरक्षण की सीमा को लेकर विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सामान्य परिस्थितियों में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की थी। इस सीमा से आगे जाने के लिए असाधारण परिस्थितियों को प्रमाणित करना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार को पिछड़ेपन और संबंधित परिस्थितियों के समर्थन में प्रामाणिक मात्रात्मक आंकड़े अदालत के सामने रखने होते हैं।
तन्खा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अभी भी राज्य सरकार के पास अपना पक्ष रखने का रास्ता है। यदि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, तो उसे पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, आरक्षण से जुड़े मामले में आंकड़ों और कानूनी आधार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार को उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकारी अध्यादेश या कानून का बचाव करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप या सहयोग कर सकते हैं, लेकिन सरकार के पास उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और प्रशासनिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने का दायित्व सरकार का ही है।
दूसरी ओर, मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पर्याप्त तैयारी के बिना ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का कदम उठाया था। उनके अनुसार, संबंधित विधेयक में तकनीकी और कानूनी कमियां थीं, जिनके कारण मामला विवादों में उलझा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के हितों के नाम पर ऐसा निर्णय लिया, जिसका कानूनी आधार पर्याप्त मजबूत नहीं था।
राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ओबीसी सहित सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार कानूनी मंचों पर अपना पक्ष रखेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जिससे किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।इस पूरे विवाद में अब राज्य सरकार की कानूनी रणनीति और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एक ओर विवेक तन्खा ने आंकड़ों के आधार पर मजबूत पैरवी की जरूरत बताई है, वहीं भाजपा ने आरक्षण से जुड़ी मौजूदा कानूनी स्थिति के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
