इस विरोध की गूंज इंदौर में पहले ही सुनाई दे चुकी है। मंगलवार रात टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन के नेतृत्व में रीगल स्क्वायर पर प्रदर्शन किया गया जिसमें 150 से ज्यादा व्यापारी शामिल हुए। व्यापारियों ने यूपीआई बंद करो और यूपीआई पर चार्ज बंद करो जैसे नारे लगाकर अपनी नाराजगी जताई। व्यापारियों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है और ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लगने से खासकर उन कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा जिनके यहां रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल लेनदेन होते हैं।
व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल के मुताबिक 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के पर्सन टू मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होने की बात कही गई है। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 तक बताई गई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी कारोबारी को एक दिन में ₹2000 से अधिक के कई लेनदेन मिलते हैं तो कुल शुल्क उसके लिए बड़ी रकम बन सकता है। थोक किराना कारोबारियों की चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उनके यहां बड़ी राशि के लेनदेन आम हैं। व्यापारियों के अनुसार किराना कारोबार में 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन ₹2000 से ऊपर के हो सकते हैं।
थोक तेल कारोबार का उदाहरण देते हुए व्यापारियों ने कहा कि 15 लीटर तेल का एक जार भी करीब ₹2200 तक का हो सकता है। ऐसे में ग्राहक यदि यूपीआई से भुगतान करता है तो कारोबारी के हिस्से में अतिरिक्त शुल्क आने की चिंता है। व्यापारियों का कहना है कि छोटे मार्जिन वाले कारोबार में इस तरह का अतिरिक्त खर्च सीधे कमाई पर असर डाल सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप संचालक भी विरोध के साथ सामने आए हैं। प्रदेश के करीब 4700 पेट्रोल पंपों से जुड़े डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के बिल पर यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला बताया है। इससे साफ है कि प्रस्तावित शुल्क को लेकर विरोध केवल किसी एक व्यापारिक वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि अलग अलग कारोबार से जुड़े व्यापारी अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं।
हालांकि प्रस्तावित बदलाव के बीच ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि विरोध का मुख्य मुद्दा व्यापारी से जुड़ा शुल्क है। व्यापारियों का कहना है कि वे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। आज का नो-UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक हिस्सा है। अब देखना होगा कि व्यापारियों की आपत्ति और प्रस्तावित एमडीआर को लेकर आगे क्या फैसला होता है और इसका डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर कितना असर पड़ता है।
