रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम में सोमवार को तेजकुंवरबाई काश्यप का अंतिम संस्कार किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और रतलाम शहर के विधायक चेतन्य काश्यप ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। स्टेशन रोड स्थित वीसाजी मेंशन से सुबह करीब 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची जहां धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से काश्यप परिवार के साथ ही उनसे जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
अंतिम यात्रा से पहले तेजकुंवरबाई काश्यप का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया और पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी सहित भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी भी अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित रहे। व्यापारियों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। त्रिवेणी मुक्तिधाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया था। वह पिछले कई दिनों से बीमार थीं। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। परिवार और परिचितों के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति है। उनके जीवन की कहानी संघर्ष और जिम्मेदारी निभाने के साथ धर्म और समाजसेवा के प्रति समर्पण से जुड़ी रही।
तेजकुंवरबाई का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्य प्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चंपालाल खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की पहली धर्मशाला चंपा निवास का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमार काश्यप से हुआ। लेकिन वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद उनके जीवन की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी। कम उम्र में पति को खोने के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और पारिवारिक दायित्वों के साथ धार्मिक गतिविधियों तथा तपस्या और साधना के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा।
उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद परिवारों और महिलाओं के लिए किए गए प्रयास भी रहे। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन ने रतलाम में अहिंसा ग्राम की स्थापना की थी। यहां करीब 100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने और उनके संस्कार निर्माण से जुड़े प्रयासों में तेजकुंवरबाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल परिवारों को बसाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी काम किया।
महिलाओं को सिलाई बुनाई कढ़ाई और दूसरे उपयोगी कौशलों का प्रशिक्षण दिलाने के प्रयासों के जरिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में उन्होंने सहयोग किया। स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी उनके सामाजिक योगदान का हिस्सा रही। उनके कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहारा देना और महिलाओं को अपनी आजीविका के लिए सक्षम बनाना था।
सोमवार को अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धांजलि उनके प्रति सम्मान को दर्शाती रही। तेजकुंवरबाई काश्यप अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां संभालने से लेकर जरूरतमंदों के लिए काम करने तक का उनका जीवन परिचितों और समाज से जुड़े लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।
