राशन विक्रेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में करीब 28 हजार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में राशन दुकानदारों की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन बढ़ती महंगाई और दुकान संचालन से जुड़े खर्च के मुकाबले उन्हें मिलने वाला कमीशन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि कम आमदनी में दुकान का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
संघ की सबसे प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन को बढ़ाकर कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल करना है। इसके साथ ही प्रत्येक राशन विक्रेता के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम गारंटीड आय तय करने की मांग रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में इतनी आय के बिना राशन दुकान चलाना कठिन हो रहा है।
राशन विक्रेताओं ने खाद्यान्न में होने वाली शॉर्टेज को लेकर भी राहत की मांग की है। संघ ने प्रति क्विंटल एक किलो तक की शॉर्टेज की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अलावा हर महीने मिलने वाले कमीशन का भुगतान अधिकतम महीने की पांच तारीख तक अनिवार्य रूप से किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। विक्रेताओं का कहना है कि कमीशन मिलने में देरी होने से रोजमर्रा के खर्च और दुकान संचालन की व्यवस्था प्रभावित होती है।
संघ ने सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों के अधीन काम करने वाले राशन विक्रेताओं के कमीशन भुगतान को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। विक्रेताओं का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया होने के कारण कई बार कमीशन समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे में शासन को भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनानी चाहिए।
राशन विक्रेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। संघ के सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार बिहार में 258 रुपये प्रति क्विंटल केरल में 270 रुपये हरियाणा और दिल्ली में 200 रुपये तथा महाराष्ट्र में 170 रुपये तक कमीशन दिए जाने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला कमीशन इन राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में यहां भी कमीशन को बढ़ाकर दुकानदारों को आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।
संघ ने शासन को सात दिवसीय आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से एक अक्टूबर 2026 से आंदोलन और हड़ताल की सूचना दी गई है। हालांकि राशन विक्रेताओं को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री खाद्य विभाग और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालेंगे। विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इसलिए उनकी आर्थिक मांगों पर सरकार को सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। अब सभी की नजर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।
