घटना विजयपुर नगर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। ऊंचाई पर बैठे युवक को देखकर स्थानीय लोग घबरा गए और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लगातार युवक से बातचीत कर उसे शांत करने की कोशिश करती रही।
करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान युवक बार बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने की मांग करता रहा। वह मीडिया से बात कराने की भी जिद करता रहा ताकि अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सके। पुलिस अधिकारियों प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों ने धैर्य के साथ उससे बातचीत जारी रखी। काफी समझाइश और भरोसा दिलाने के बाद आखिरकार युवक सुरक्षित नीचे उतर आया जिससे सभी ने राहत की सांस ली।
नीचे आने के बाद युवक ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी लगभग पंद्रह दिन पहले उसे छोड़कर मायके चली गई थी। उसका कहना था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी और मानसिक तनाव के चलते उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने जैसा कदम उठाया। युवक का कहना था कि वह चाहता था उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए।
हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग है। विजयपुर थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस ने बताया कि पत्नी की शिकायत के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने संयम और सतर्कता के साथ स्थिति को संभाला जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। अधिकारियों ने युवक को उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। फिलहाल पुलिस पति पत्नी के बीच विवाद की वास्तविक वजह जानने में जुटी है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि पारिवारिक विवाद यदि समय रहते बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से नहीं सुलझाए जाएं तो वे सार्वजनिक घटनाओं का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में खतरनाक कदम उठाने के बजाय संवाद और कानून का सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और उचित रास्ता है।
