जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के वेटिंग हॉल की क्षमता लगभग 50 लोगों की है, लेकिन मुख्यमंत्री की अगवानी के दौरान करीब 150 लोग वहां पहुंच गए। बाहर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और अंदर अत्यधिक भीड़ के कारण सेंट्रल एसी सिस्टम पर दबाव बढ़ गया और वह बार-बार ट्रिप होने लगा, जिससे कूलिंग पूरी तरह ठप हो गई।
भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रियों और मौजूद लोगों को राहत देने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन को आनन-फानन में चार जंबो कूलर लगाने पड़े। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
यह घटना केवल तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एयरपोर्ट की तैयारियों और मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल खड़े कर गई। बताया जा रहा है कि यह एयरपोर्ट अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है और यहां तक कि 6 सीटर छोटे विमान भी सुरक्षित रूप से नहीं उतर पा रहे हैं।
इसी वजह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भोपाल से विमान द्वारा रीवा पहुंचना पड़ा और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए सतना आना पड़ा। यह स्थिति एयरपोर्ट की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाती है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 31 मई को इस एयरपोर्ट का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत में अभी भी कई सुविधाएं अधूरी हैं। बड़े-बड़े दावों के बावजूद एयरपोर्ट पर मूलभूत व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
