जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग न्यायिक फैसले मौजूद हैं और कानून की स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भी भेजा जा सकता है, ताकि भविष्य के मामलों के लिए स्पष्ट दिशा तय हो सके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां अदालत में पेश की जाएं। अदालत यह जानना चाहती है कि गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को किन धाराओं और किन आधारों की जानकारी दी गई थी।
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या होगी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी जरूरी जानकारी दी गई थी और गलत धारा का उल्लेख केवल लिपिकीय त्रुटि थी, जिससे पूरी गिरफ्तारी अवैध नहीं हो जाती।
दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक हर स्तर पर पूरा सहयोग किया है।
इससे पहले मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को सोनम को जमानत देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की हत्या से संबंधित धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403 दर्ज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की गंभीर चूक माना और कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की सही जानकारी नहीं दी गई।
अब सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या ऐसी लिपिकीय त्रुटि गिरफ्तारी को अवैध बनाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है। यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमत नहीं होती है तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होने की संभावना भी बन सकती है।
इस बीच हाल ही में राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि सोनम जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर नेपाल भाग गई है और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि सोनम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह शिलॉन्ग में ही मौजूद है और अदालत तथा जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
गौरतलब है कि मई 2025 में इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित सहयोगियों ने रची थी। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था और फिलहाल इसकी सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है।
