अब राहुल गांधी की टीम ने प्रियंका के परिवार से संपर्क किया है और उसे इलाज के लिए दिल्ली बुलाने की बात कही है। प्रियंका के मुताबिक कार्यक्रम के बाद दिल्ली से राहुल गांधी की टीम की एक महिला का फोन आया था। फोन पर उन्हें जल्द इलाज के लिए दिल्ली आने की जानकारी दी गई। इस खबर के बाद प्रियंका और उसके परिवार में उम्मीद जगी है कि वर्षों से अधूरा पड़ा इलाज अब आगे बढ़ सकेगा।
प्रियंका ने बताया कि जब वह करीब तीन साल की थी तब उसकी आंख में चूना चला गया था। इस हादसे के बाद उसकी एक आंख से दिखाई देना बंद हो गया। 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान बड़ौदा में उसका एक ऑपरेशन भी कराया गया था। डॉक्टरों ने आगे एक और ऑपरेशन की जरूरत बताई थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह लगातार इलाज का खर्च उठा सके। इसके बाद उपचार रुक गया।
प्रियंका के पिता उदय सिंह सेंगर किसान हैं। परिवार के पास करीब तीन एकड़ जमीन है लेकिन सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण खेती से नियमित आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में बेटी के इलाज का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। एक ऑपरेशन के बाद आगे इलाज न करा पाना भी इसी आर्थिक स्थिति से जुड़ा रहा।
इंदौर के कार्यक्रम के बाद प्रियंका के परिवार से अन्य लोगों ने भी संपर्क किया। जिले के समाजसेवी सरदार नरगावे और विधायक विक्रांत भूरिया की ओर से भी फोन आया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रियंका को मिलने के लिए बुलाया और उसके पिता से फोन पर बातचीत कर आंखों के इलाज तथा परिवार की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली।
प्रियंका फिलहाल इंदौर में रहकर यूजीसी नेट की तैयारी कर रही है। आंखों की परेशानी के बावजूद उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी है और आगे शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ने का सपना देख रही है। अब दिल्ली में प्रस्तावित इलाज को लेकर परिवार को उम्मीद है कि उसकी आंख की समस्या का आगे उपचार संभव हो सकेगा। प्रियंका का कहना है कि वह वर्षों से सामान्य लोगों की तरह देखने का सपना देखती रही है और अब उसे लगता है कि यह सपना पूरा होने की उम्मीद बनी है।
इंदौर में राहुल गांधी से बातचीत के दौरान प्रियंका ने सिर्फ अपनी आंख की समस्या ही नहीं बताई थी बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों से जुड़े कई मुद्दे भी सामने रखे थे। उसने सरकारी हॉस्टलों में सीटों की कमी और भोजन तथा दूसरी सुविधाओं की समस्याओं का जिक्र किया था। प्रियंका ने बताया था कि उसने कक्षा एक से 12वीं तक सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की है।
उसने हॉस्टल में भोजन से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया था। उसके मुताबिक कई बार घर से लाई लाल मिर्च की चटनी के साथ रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उसने छात्राओं से वार्डन द्वारा काम करवाए जाने का आरोप भी लगाया था। प्रियंका ने यह भी बताया था कि 12वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए पर्याप्त सरकारी हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्राओं को किराए के कमरों में रहना पड़ता है और किराए तथा आवास भत्ते के बीच भी अंतर रहता है।
अब प्रियंका के लिए दिल्ली से आया इलाज का बुलावा सिर्फ चिकित्सा से जुड़ी खबर नहीं बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे एक सपने के आगे बढ़ने की उम्मीद है। पढ़ाई जारी रखते हुए वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है और परिवार को भरोसा है कि आगे होने वाला उपचार उसकी जिंदगी में नई संभावनाएं खोल सकता है।
