जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिन पहले भेजे गए पत्र में कहा कि मूल्य समर्थन योजना के तहत मध्य प्रदेश को पहले ही देश का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है। इसके बावजूद खरीदी की गति बेहद धीमी है और अब तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम खरीद हो पाई है।
केंद्र सरकार के मुताबिक मध्य प्रदेश के लिए इस वर्ष 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। लेकिन 16 जुलाई 2026 तक केवल 7 हजार 947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है जो स्वीकृत मात्रा का लगभग दो प्रतिशत है। इस दौरान करीब 12 हजार किसानों से ही उपज खरीदी गई। केंद्र ने राज्य सरकार से खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने और पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया है।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल्य समर्थन योजना के दिशा निर्देशों के अनुसार तूर उड़द और मसूर जैसी फसलों की शत प्रतिशत खरीद की व्यवस्था है जबकि अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। इसलिए अतिरिक्त कोटा तभी स्वीकृत किया जाएगा जब पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीद पूरी हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 19 हजार 692 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की मंजूरी दी गई थी। इसके विरुद्ध 3 लाख 93 हजार 123.79 मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई थी। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 3 हजार 413.10 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया और 1 लाख 22 हजार 776 किसानों को इसका लाभ मिला।
पत्र में सोयाबीन का उदाहरण भी दिया गया है। केंद्र ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन स्वीकृत की गई थी। इसके लिए 1 हजार 93.13 करोड़ रुपए जारी किए गए जिससे 7 लाख 10 हजार 257 किसानों को लाभ मिला।
इधर नर्मदापुरम सीहोर रायसेन हरदा और आसपास के जिलों में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जुलाई से किसान क्रांति पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू होकर बुधनी बरखेड़ा ओबेदुल्लागंज मंडीदीप होते हुए 29 और 30 जुलाई को भोपाल पहुंचेगी। किसान मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा और रेल मार्ग भी बाधित किया जा सकता है। ऐसे में मूंग खरीदी का मुद्दा अब किसानों के आंदोलन के साथ राजनीतिक टकराव का भी बड़ा विषय बनता जा रहा है।
