सरकार की इस नई योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यात्रियों को पूरी तरह डिजिटल सुविधाएं मिलेंगी। बसों में इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा जिससे टिकट लेने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। इसके साथ ही हर बस में आधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे जो हर दस सेकेंड में वाहन की लाइव लोकेशन अपडेट करेंगे। यात्री वेबसाइट के माध्यम से बस की वास्तविक स्थिति जान सकेंगे जिससे उन्हें बस के आने और पहुंचने का सही समय पता चल सकेगा और अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।
परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन बसों का संचालन मध्यप्रदेश यात्री बस परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर परमिट जारी किए जाएंगे जबकि संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी बस संचालकों के सहयोग से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से बेहतर संसाधनों का उपयोग होगा और यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। योजना लागू होने के सात दिन के भीतर बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई परिवहन नीति के तहत प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहर और जिले आपस में बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इसमें भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर रीवा सागर छिंदवाड़ा खंडवा खरगोन बड़वानी रतलाम धार नीमच मंदसौर शिवपुरी गुना शाजापुर देवास सीहोर नरसिंहपुर सहित अनेक जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख मार्ग शामिल किए गए हैं। इन मार्गों पर यात्रियों की संख्या और ट्रैफिक के अनुसार बसों की संख्या भी तय की जाएगी ताकि भीड़भाड़ वाले रूटों पर लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।
योजना में यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग अलग श्रेणी की बसों का संचालन किया जाएगा। सामान्य मार्गों पर 23 से 34 सीटों वाली मिडी बसें चलाई जाएंगी जिनमें साधारण सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणी शामिल होगी। वहीं लंबे और व्यस्त इंटरसिटी मार्गों पर 35 से 70 सीटों वाली स्टैंडर्ड बसें संचालित होंगी जिनमें एसी डीलक्स एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे यात्रियों को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।
सरकार का मानना है कि नई परिवहन नीति लागू होने से प्रदेश में सार्वजनिक बस सेवा अधिक व्यवस्थित सुरक्षित और समयबद्ध बनेगी। साथ ही निजी और सरकारी भागीदारी के जरिए परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डिजिटल टिकटिंग और लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएंगी और सार्वजनिक परिवहन पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो मध्यप्रदेश में बस यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और तकनीक आधारित हो जाएगी।
