45 डिग्री तक पहुंच चुके तापमान के बीच महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सिर पर पानी के बर्तन रखकर रोज पानी ढो रहे हैं। गांव की महिलाएं पानी लाते समय लोकगीत गाते हुए लौटती हैं, जो इस संघर्ष की दर्दभरी तस्वीर बयां करता है।
वर्षों पुरानी है पानी की समस्या
खिलचीपुर जनपद की बावड़ीखेड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले फतेहपुर गांव की आबादी करीब 200 बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में पानी की समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। गर्मी बढ़ते ही हालात और बिगड़ जाते हैं।
ग्रामीण गजराजसिंह गुर्जर का कहना है कि बचपन से गांव में पानी की परेशानी देख रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों और पंचायत से शिकायत की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला।
सरपंच के जवाब से ग्रामीण नाराज
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या बताने पर सरपंच ने कहा, “क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी जमीन बेच दूं? जब सरकार व्यवस्था करेगी तब टैंकर लगवाएंगे।” इस बयान के बाद गांव में नाराजगी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और पंचायत दोनों उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
ग्रामीण निकिता गुर्जर ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी लाने में काफी समय और मेहनत लगती है। स्कूल खुलने के बाद बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि पानी भरने के बाद वे बेहद थक जाते हैं। ग्रामीणों ने गांव में डेम और ट्यूबवेल बनाने की मांग की है, ताकि लोगों को पानी के लिए दूसरे राज्य पर निर्भर न रहना पड़े।
महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान
रेखाबाई ने बताया कि पूरा परिवार पानी लाने जाता है और तेज गर्मी में यह काम बेहद मुश्किल हो जाता है। वहीं मांगीबाई का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे भी पानी ढोने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है।
प्रशासन ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
खिलचीपुर जनपद के सीईओ गोविंदसिंह सोलंकी ने माना कि गांव में पानी की समस्या है। उन्होंने बताया कि गांव में नल-जल योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी योजना पंचायत को हैंडओवर नहीं हुई है। उनका कहना है कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
वहीं एसडीएम अंकिता जैन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जल निगम से चर्चा कर तत्काल समाधान के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि भविष्य में ग्रामीणों को पानी के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
