अगस्त के तीसरे सप्ताह में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ के साथ डिप्रेशन और निम्न दबाव क्षेत्र बनने से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। डिंडौरी और सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा जबकि कई इलाकों में झरने भी तेज बहाव के साथ बहते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
प्रदेश के संभागों की स्थिति देखें तो भोपाल शहडोल रीवा और जबलपुर संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसके उलट इंदौर उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पूर्वी हिस्से के भी कई जिलों में कमी है लेकिन कुछ क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके मुकाबले मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां करीब 12 इंच पानी ही गिरा है। भिंड में भी लगभग 22 इंच बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर अनूपपुर सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भोपाल गुना ग्वालियर खंडवा खरगोन और राजगढ़ समेत 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
मानसून की शुरुआत इस साल कुछ देरी से हुई थी। मध्य प्रदेश में मानसून 24 जून को पहुंचा था और इसके बाद करीब नौ दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय हो गया। जून में बारिश की कमी करीब 30 प्रतिशत रही थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में बारिश ने जोर पकड़ा और आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद कुछ समय मानसून कमजोर रहा लेकिन जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह तथा अगस्त में कई दौर में अच्छी बारिश हुई।
बारिश का सीधा असर प्रदेश के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। कई बड़े बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बरगी और जौहिला समेत कुछ बांधों के गेट खोले गए हैं। बरगी बांध के 13 गेट खुलने से निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ी है। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कुछ बांधों में अभी अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ है।
आने वाला सप्ताह मध्य प्रदेश के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो फिलहाल पीछे चल रहे जिलों के आंकड़े में सुधार हो सकता है। खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के उन इलाकों को बारिश की जरूरत है जहां सामान्य से काफी कम पानी गिरा है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रदेश के लिए मानसून के लिहाज से राहत देने वाले साबित हो सकते हैं।
