स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ मंत्रालय में अहम बैठक हुई। इस बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन यानी JUDA और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी MTA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बन गई और आखिरकार 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड तय किया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों को 18,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में लंबे समय तक काम करने की जिम्मेदारी को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत हुई। अंततः सरकार ने अपने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दी और इसी पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।
इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई जिसके बाद समाधान का रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। JUDA और MTA के प्रतिनिधियों ने भी बैठक के बाद सकारात्मक बातचीत पर संतोष जताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलना महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का भी आभार व्यक्त किया।
बैठक में केवल स्टाइपेंड का मुद्दा ही नहीं बल्कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम भी गठित की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज का भरोसा भी दिया है।
दरअसल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन के कारण कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। हालात उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया जिसके बाद डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी।
अब 21,500 रुपये स्टाइपेंड पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। यह फैसला न केवल इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती का समाधान साबित हुआ है। आने वाले दिनों में इंटर्न डॉक्टरों के ड्यूटी पर लौटने के साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।
