एमजीएम मेडिकल कॉलेज को मिली इन नई सीटों में सबसे ज्यादा 12 सीटें कम्युनिटी मेडिसिन विभाग को मिली हैं। इसके बाद पैथोलॉजी विभाग में 9 नई सीटों की मंजूरी दी गई है। ऑर्थोपेडिक्स विभाग में 5 और जनरल सर्जरी में 4 सीटें बढ़ाई गई हैं। वहीं एनाटॉमी में 2 सीटें और फॉरेंसिक मेडिसिन में 2 सीटों को मंजूरी मिली है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 2 और साइकियाट्री विभाग में भी 2 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इसके अलावा डर्मेटोलॉजी विभाग को 1 नई सीट मिली है। इस तरह कुल 9 विभागों में 39 सीटों का विस्तार हुआ है।
सीटों की संख्या बढ़ने से अब अधिक मेडिकल स्नातकों को विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। पीजी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को संबंधित विषय में गहन अध्ययन के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलता है। ऐसे में नए विद्यार्थियों के आने से विभागों की शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मेडिकल रिसर्च और क्लीनिकल ट्रेनिंग के क्षेत्र में भी संस्थान की क्षमता बढ़ने की संभावना है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि पीजी की 39 नई सीटों की स्वीकृति कॉलेज की शैक्षणिक क्षमता और विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता का परिणाम है। अब 322 पीजी और 13 सुपर स्पेशियलिटी सीटों के साथ संस्थान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। उनके मुताबिक किसी भी मेडिकल कॉलेज की वास्तविक पहचान वहां से तैयार होने वाले कुशल और विशेषज्ञ डॉक्टरों से होती है। सीटें बढ़ने से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण का मौका मिलेगा।
इस उपलब्धि का असर केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ विभागों में पीजी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिल सकती है। विशेष रूप से सर्जरी और ऑर्थोपेडिक्स जैसे विभागों में प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से उपचार संबंधी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। इससे ऑपरेशन की प्रक्रिया और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
डीन के अनुसार संस्थान का उद्देश्य केवल मेडिकल शिक्षा का विस्तार करना नहीं है बल्कि बेहतर प्रशिक्षण के जरिए प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत बनाना है। नई सीटों से चिकित्सा शिक्षा और शोध को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही आने वाले वर्षों में अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार हो सकेंगे। हालांकि मरीजों को इसका सीधा लाभ किस स्तर तक और कितनी जल्दी मिलेगा यह अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और सेवाओं के विस्तार पर भी निर्भर करेगा। फिलहाल 39 नई पीजी सीटों की मंजूरी ने इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दिलाई है।
