आबकारी विभाग के कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि विभाग को मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई थी कि तुलसी नगर के एक बंगले में बड़े पैमाने पर अवैध शराब तैयार की जा रही है। सूचना की पुष्टि होने के बाद विशेष टीम का गठन कर मौके पर दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान टीम को भारी मात्रा में अवैध शराब के साथ शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मशीनरी भी मिली। बरामद सामग्री को जब्त कर लिया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
पूछताछ में आरोपी विनोद तलइया ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। उसने स्वीकार किया कि तैयार शराब को इंदौर सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता था। जांच अधिकारियों के अनुसार यह कारोबार लंबे समय से संचालित किया जा रहा था और इसके जरिए बड़ी मात्रा में अवैध कमाई की जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि तैयार शराब को केसर कस्तूरी नाम से बाजार में बेचा जा रहा था।
आबकारी विभाग को आशंका है कि बरामद शराब में ऐसे रसायनों का उपयोग किया गया हो सकता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए शराब के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि शराब में किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था और उसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग अब इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और शराब की सप्लाई किन-किन जिलों तथा राज्यों तक की जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें कहीं अवैध शराब के निर्माण या बिक्री की जानकारी मिले तो तत्काल विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई कर जनस्वास्थ्य और कानून व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
