राजधानी भोपाल सहित जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिले सामान्य वर्षा से नीचे हैं। वहीं इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के सिर्फ छह जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है।
बड़े शहरों का हाल
प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर ही ऐसा शहर है, जहां सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके विपरीत भोपाल में 7 प्रतिशत, इंदौर में 2 प्रतिशत, उज्जैन में 14 प्रतिशत और जबलपुर में 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
अगले तीन दिन भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार आगामी तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। यदि सक्रिय मौसम प्रणालियां मजबूत रहीं तो वर्षा के आंकड़ों में सुधार हो सकता है। गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, गुना, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।
पश्चिमी विक्षोभ से बढ़ेगी बारिश
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे कई इलाकों में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है।
कोटे की आधी बारिश भी नहीं
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 413.3 मिमी (16.3 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 507.2 मिमी (20 इंच) वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में करीब 19 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। लगातार कम बारिश के चलते खरीफ फसलों और जल स्रोतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
