सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे विशेषज्ञ संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल सिर्फ अकादमिक और शोध गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में इन संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की योजना है।
कॉन्क्लेव में सरकार के अलग-अलग विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां विशेषज्ञ संस्थानों के सामने रखेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए इन समस्याओं के समाधान की दिशा सुझाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार, शिक्षा संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के बीच ऐसा तालमेल तैयार करना है, जिससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाएं विकसित की जा सकें और उनका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।
इस कार्यक्रम में 59 केंद्रीय संस्थानों के अलावा 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थान और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल, MANIT भोपाल, AIIMS भोपाल, IIIT, NFSU भोपाल, RRCAT इंदौर, DRDO और ISRO जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। कृषि, चिकित्सा, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।
कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, MSME, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समाधान और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच होने वाले एमओयू भी होंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, क्षमता निर्माण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए सहयोग का रास्ता तैयार किया जाएगा। यानी इसका तत्काल असर किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियों और शोध आधारित समाधानों के रूप में सामने आ सकता है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सरकार की कोशिश है कि 2047 के लक्ष्य को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर प्रदेश में मौजूद विशेषज्ञ संस्थानों को भी उसका सक्रिय साझेदार बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस के तहत संस्थानों की ओर से सामने आने वाले संकल्प कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका वास्तविक लाभ मध्यप्रदेश को किस रूप में मिलता है।
