नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को अनावश्यक औपचारिकताओं और विभागीय चक्करों से राहत देना है।
नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल विभाग और बिजली विभाग से विभिन्न प्रकार की एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदक को स्वयं एनओसी लाने की जरूरत नहीं होगी।
यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो भवन अनुमति देने वाला सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलता है तो भवन अनुमति की प्रक्रिया बिना विलंब आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।
हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में एनओसी की अनिवार्यता बरकरार रखी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़े मामलों में एनओसी केवल तभी आवश्यक होगी जब ऑनलाइन जीआईएस आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में पाया जाएगा। सामान्य मामलों में इन विभागों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
सरकार ने पर्यावरण और अग्निशमन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया है। केवल निर्धारित सीमा से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी जहां वास्तव में पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति राष्ट्रीय भवन संहिता के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ शहरी विकास परियोजनाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।
