जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामला
यह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरा
याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।
रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्ट
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है।
जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।
