कचरा सड़कों पर जमा होने से स्थानीय रहवासियों के साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़क के किनारे जमा कचरा इतना ज्यादा था कि लोगों को वाहन निकालने में दिक्कत हुई। इंदौर जैसे शहर में जहां स्वच्छता को लेकर देशभर में उदाहरण दिया जाता है वहां सड़कों पर फैली गंदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगों को लेकर प्रशासन को गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था बाधित होने से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सफाईकर्मी नियमितीकरण सहित दूसरी मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी निगम मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दो से चार दिन के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो वे हड़ताल का फैसला ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में शहर की सफाई व्यवस्था पर और व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
मंगलवार शाम को कई इलाकों में कचरा नहीं उठने से आंदोलन के असर के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे। नियमित रूप से घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा समय पर नहीं उठ पाया तो कई जगह लोग कचरा सड़क किनारे रखने को मजबूर हुए। कुछ इलाकों में यह कचरा धीरे धीरे बढ़ता गया और सड़क के आसपास गंदगी फैलने लगी। यदि सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो नगर निगम के सामने शहर को साफ रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
शहर में फैली गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगें अपनी जगह उचित हो सकती हैं लेकिन विरोध का ऐसा तरीका नहीं होना चाहिए जिससे आम लोगों को परेशानी हो। लोगों ने यह भी चिंता जताई कि खुले में कचरा पड़ा रहने से बदबू के साथ संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने सड़कों पर कचरा फैलने के पीछे इसे योजनाबद्ध तरीके से डाले जाने की आशंका भी जताई है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इंदौर की स्वच्छता पहचान के लिहाज से यह स्थिति नगर निगम के लिए बड़ी चिंता का विषय है। शहर लगातार आठ बार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है। ऐसे में सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की बड़ी बाधा शहर की इस उपलब्धि और छवि दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। अब नजर इस बात पर है कि नगर निगम और सफाईकर्मियों के बीच बातचीत से कब समाधान निकलता है और शहर की नियमित सफाई व्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।
