पूरा मामला ग्राम रेलवा का है, जहां रहने वाले अजबसिंह कोरकू ने 1 मई को कथित रूप से कीटनाशक पी लिया था। परिजनों का आरोप है कि हंडिया थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत ने उनसे 25 हजार रुपये लेने के बावजूद लगातार प्रताड़ित किया, जिससे परेशान होकर बुजुर्ग ने यह आत्मघाती कदम उठाया।
जहर पीने के बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 4 मई को छुट्टी दे दी गई। घर लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रेफर किया गया, जहां शनिवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम के बाद रविवार को परिजन शव लेकर सीधे हंडिया थाने पहुंचे और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला गरमा गया और करीब तीन घंटे तक थाना परिसर में धरना चलता रहा। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक डॉ. आरके दोगने, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन साई और एससी-एसटी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
विधायक डॉ. आरके दोगने ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसपी और कलेक्टर पीड़ित परिवार से बात करने को तैयार नहीं हैं, जो बेहद संवेदनहीनता को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को एसपी और कलेक्टर के बंगले के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी थाने से निकलकर हाइवे पर बैठ गए। इससे सड़क पर लंबा जाम लग गया और वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। मौके पर एएसपी अमित मिश्रा ने लोगों को समझाने की कोशिश की और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
लगातार बढ़ते दबाव और प्रदर्शन के बाद देर रात प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत को लाइन अटैच कर दिया। हालांकि इसके बावजूद परिजनों की नाराजगी पूरी तरह शांत नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग जारी है।
यह पूरा घटनाक्रम जिले में पुलिस कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
