बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नीति के चलते प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके लिए हर जिले में आधुनिक हैचरी विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इस क्षेत्र के सतत विकास की कुंजी होगी।
बैठक में मोती उत्पादन को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों की सफल योजनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाकर प्रदेश में मोती उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए।
मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और जलीय जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही जल संपदा आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने इसे संतोषजनक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रखा जाए। राज्य सरकार की नई पहलें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन, मछली बीज निर्माण और जलीय संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
