नवग्रह मंदिर बना आस्था का केंद्र
ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिली। यह लगभग 150 साल पुराना मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु शनि देव सहित सभी नवग्रहों की पूजा कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर शनिवार यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
तेल, और दान का विशेष महत्व
शनि जयंती पर भक्तों ने विशेष रूप से सरसों का तेल और काले तिल अर्पित किए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कंबल, अन्न, तिल और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इस दिन पूजा और मंत्रोच्चारण से शनि दोष में राहत मिलती है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं।
वट सावित्री व्रत में महिलाओं की आस्था
इस अवसर पर महिलाओं ने वट सावित्री व्रत भी रखा, जो पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री और यमराज का स्मरण कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है।
शनि जयंती, अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहा है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा।
ग्वालियर में शनि जयंती का यह अवसर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।
