जानकारी के अनुसार, गूगर गांव निवासी अंजली रावत, उम्र 33 वर्ष, आठ महीने की गर्भवती थीं। 28 अक्टूबर को घर के पीछे बने कुएं में कूदने से अंजली और उनके छह वर्षीय बेटे प्रशांत रावत की मौत हो गई थी। बताया गया है कि अंजली के पति धर्मवीर रावत की करीब एक महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद परिवार पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा था। अब अंजली और उनके बेटे की मौत के बाद परिवार में धर्मवीर की तीन बेटियां ही रह गई हैं।
घटना के बाद तीनों बच्चियों की देखभाल और भविष्य को लेकर प्रशासन ने कदम उठाए हैं। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार दृगपाल सिंह बैस गांव पहुंचे और परिवार की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बच्चियों की देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए उन्हें उनकी दादी दुलारी रावत की निगरानी में रखने के निर्देश दिए। इससे बच्चियों को परिवार के बीच देखभाल मिल सकेगी।
प्रशासन ने बच्चियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी प्रक्रिया शुरू की है। तहसीलदार ने संबंधित पटवारी को परिवार का बीपीएल राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दादी को परिवार का मुखिया बनाने की कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि परिवार को पात्रता के अनुसार शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सके।
तीनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की पहल भी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों को पात्रता के अनुसार प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। प्रशासन बच्चियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है, ताकि उनके पालन-पोषण में आर्थिक मदद मिल सके।
तहसीलदार दृगपाल सिंह बैस ने पोहरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी चर्चा की और बच्चियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से राशन कार्ड, परिवार के मुखिया से संबंधित प्रक्रिया और आर्थिक सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। मां और भाई को खो चुकी तीनों बच्चियों के लिए अब उनकी दादी की देखरेख और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली मदद महत्वपूर्ण होगी।
