ग्वालियर। मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने इस मामले में मुख्य आरोपी रियाल चौधरी और उसके साथी सम्यक बौधी को जेल से वापस पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। दोनों से की जा रही पूछताछ के दौरान पुलिस इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और विदेश यात्राओं से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाने में लगी है। जांच के दो प्रमुख बिंदु हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में पैसा कहां से आया और संदिग्ध पासपोर्ट के जरिए कितने लोग विदेश गए।
एसटीएफ की जांच में सम्यक बौधी के बैंक खाते अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। अधिकारियों ने उसके बैंक खातों के स्टेटमेंट हासिल कर लिए हैं और अब उनमें हुए लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खातों में रकम किन लोगों ने जमा कराई और किस उद्देश्य से पैसे ट्रांसफर किए गए। इसके साथ ही नकद निकासी का विवरण भी खंगाला जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के बदले किसे कितना कमीशन मिला और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
इस मामले में गुलाब राय गौतम का बैंक खाता भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रियाल चौधरी कथित तौर पर कमीशन देकर इस खाते का इस्तेमाल करता था और इसमें लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। एसटीएफ अब बैंक रिकॉर्ड और पूछताछ से मिली जानकारी को जोड़कर आर्थिक लेनदेन की पूरी कड़ी तैयार कर रही है। इससे कथित नेटवर्क के वित्तीय संचालन और उसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
जांच का दूसरा बड़ा पहलू विदेश यात्राओं से जुड़ा है। एसटीएफ ने 70 संदिग्ध पासपोर्ट धारकों का पूरा रिकॉर्ड हासिल करने के लिए पासपोर्ट कार्यालय से डेटा मांगा है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि इन पासपोर्ट के आधार पर कितने लोग विदेश गए और उनमें से कितने वापस भारत लौटे। यदि कोई व्यक्ति विदेश जाने के बाद वापस नहीं आया है तो उसकी यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सम्यक बौधी ने कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय बताने के लिए उन्हें दो साल से जानने संबंधी शपथ पत्र दिए थे। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि रियाल चौधरी और सम्यक बौधी की मुलाकात कैसे हुई और कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने की योजना किसने तैयार की। इन दस्तावेजों के आधार पर पहचान और निवास संबंधी प्रमाणपत्र कैसे हासिल किए गए इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
बताया गया है कि डबरा भोपाल और बैतूल के कुछ बौद्ध विहारों तथा मठों के पते इस मामले में सामने आए हैं। एसटीएफ जांच कर रही है कि इन पतों का इस्तेमाल संदिग्ध पासपोर्ट बनवाने के लिए किस तरह किया गया। आधार कार्ड मूल निवासी प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसी व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट शाखा में दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया भी अधिकारियों के रडार पर है।
अब बैंक खातों के लेनदेन और पासपोर्ट कार्यालय से मिलने वाले यात्रा रिकॉर्ड के आधार पर एसटीएफ जांच की अगली दिशा तय करेगी। इन जानकारियों से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मददगारों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि मामले में किसकी क्या भूमिका रही है इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
