DOTS प्रोवाइडर्स टीबी नियंत्रण व्यवस्था में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों के घर पहुंचकर उन्हें निर्धारित समय पर दवा लेने में मदद करते हैं और इलाज के दौरान फॉलोअप बनाए रखते हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों की जांच से जुड़े नमूने भी अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। इसके अलावा मरीज के परिवार के सदस्यों की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जरूरी जानकारी अपडेट करने जैसे काम भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल हैं। केंद्र सरकार के टीबी कार्यक्रम में भी DOTS प्रोवाइडर्स को उपचार के दौरान मरीजों को सहयोग देने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रहा है।
कोलार सीएससी से जुड़ी पुष्पा सिंह बघेल के अनुसार वह वर्ष 2023 से DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया था लेकिन मार्च 2025 से उन्हें भुगतान नहीं मिला है। पुष्पा का कहना है कि जब भी लंबित भुगतान को लेकर जानकारी ली जाती है तो बजट की कमी बताकर जल्द राशि जारी होने की बात कही जाती है। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण अब घरेलू खर्च संभालना मुश्किल हो गया है।
एक अन्य महिला DOTS प्रोवाइडर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि बच्चों की फीस भरने में भी परेशानी हो रही है। घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा में किसी तरह की कमी नहीं की गई है लेकिन भुगतान नहीं मिलने से परिवार पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
अशोका गार्डन क्षेत्र की पंजाबी बाग डिस्पेंसरी से जुड़ी दिव्या भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। वह पढ़ाई के साथ DOTS प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक करीब एक साल से भुगतान नहीं मिला है। भोपाल जैसे शहर में किराए का कमरा लेकर पढ़ाई करना और रोजमर्रा के खर्च संभालना पहले ही चुनौतीपूर्ण है। इसके साथ मरीजों के घर जाकर लगातार सेवा देने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से स्थिति और कठिन हो गई है।
DOTS प्रोवाइडर्स का कहना है कि गर्मी हो या बारिश उन्होंने मरीजों की सेवा बंद नहीं की। वे घर घर जाकर दवाएं पहुंचाते रहे और मरीजों के इलाज का फॉलोअप करते रहे। उनका कहना है कि यदि कोई मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता है तो उसके घर से जरूरी नमूना लेकर जांच के लिए जमा कराने जैसे काम भी किए जाते हैं।
लंबित भुगतान को लेकर DOTS प्रोवाइडर्स ने 3 अगस्त 2026 को राज्य क्षय अधिकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश को पत्र देकर प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की है। पत्र में करीब 10 से 11 महीने की राशि लंबित होने का उल्लेख किया गया है। प्रोवाइडर्स का कहना है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं।
मध्यप्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और केंद्रीय टीबी डिवीजन के माध्यम से कार्यक्रम संचालित है। केंद्रीय टीबी डिवीजन की मध्यप्रदेश संबंधी आधिकारिक वेबसाइट पर भी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े दिशा निर्देश और संसाधन उपलब्ध हैं। अब DOTS प्रोवाइडर्स को उम्मीद है कि सरकार उनकी लंबित राशि का जल्द भुगतान करेगी ताकि मरीजों की सेवा करने वाले इन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी आर्थिक राहत मिल सके।
