उज्जैन । महाकाल से रामलला तक दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, पांच पवित्र नदियों का जल लेकर जाएंगे अयोध्या
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
यात्रा को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिप्रा गार्डन में आयोजित बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। यात्रा के शुभारंभ के दिन 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अर्चन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें दिग्विजय सिंह के साथ हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद पदयात्रा अपने गंतव्य अयोध्या की ओर रवाना होगी।
आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य सत्य धर्म न्याय सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया है। इसके साथ ही चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग भी यात्रा के दौरान उठाई जाएगी। आयोजक इसे किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय सामाजिक और धार्मिक जनजागरण की पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह और अमृता राय प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार यात्रा में लगभग 2000 से 3000 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा से जुड़ने के लिए लोगों ने पंजीकरण भी कराया है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि लंबे सफर के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा जा सके।
उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कनिपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदूरिया तराना और कनासिया से होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क के जरिए यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया जा रहा है जिसमें पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाएंगे। भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा रथ निर्माण का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में शिप्रा नदी का जल कल्याणपुरा घाट से एकत्र किया गया। सुरेंद्र सुहाने अभिषेक गौर योगेंद्र सिंह परिहार भरत पोरवाल और नासिर पटेल ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। शिप्रा नदी से लाया गया जल फिलहाल राजेंद्र वशिष्ठ के निवास स्थित मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। यात्रा के शुभारंभ पर इसे विशेष रथ में स्थापित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले शुभारंभ और उज्जैन से अयोध्या तक निकलने वाली इस लंबी पदयात्रा पर टिकी हैं।
