मध्य प्रदेश। के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रस्तावित आयोजन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा की है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से सवाल किया कि संघ का कार्यक्रम ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं कराया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखकर आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे।
दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी प्रस्तावित सनातन यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं। इसी सिलसिले में इंदौर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। डेली कॉलेज में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर उन्होंने संस्थान के प्रबंधन के सामने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर से राष्ट्रीय और प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। इसके अलावा 28 अक्टूबर को यहां करीब एक लाख स्वयंसेवकों के जुटने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी डेली कॉलेज बोर्ड के चेयरमैन विक्रम पंवार और अन्य सदस्यों के साथ बैठक हुई थी। बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि कॉलेज परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। हालांकि, उनके अनुसार बोर्ड चेयरमैन ने यह भी कहा कि इस बार संघ के आयोजन को रोकना संभव नहीं है। दिग्विजय सिंह ने इसी निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर में इस तरह के आयोजन से बचना चाहिए।
उन्होंने बताया कि डेली कॉलेज के संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी उन्होंने इस विषय पर बात की थी। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से कहा कि कॉलेज में संघ का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि इस आयोजन के लिए ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का चयन क्यों नहीं किया जाता। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उनके इस सवाल पर सिंधिया ने कोई जवाब नहीं दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मामले में डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखने जा रहे हैं। पत्र के माध्यम से वह आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, तब इस दौरान डेली कॉलेज में कभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने ये बातें इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम के दौरान कहीं।
राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी संबंधों पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपना पुराना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय के साथ उनकी मित्रता करीब 30 से 35 साल पुरानी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती के बावजूद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में कोई कमी नहीं रहती। दोनों एक-दूसरे की आलोचना भी करते हैं। उनके मुताबिक, राजनीति में मतभेद होना जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा और सुंदरलाल पटवा जैसे नेताओं के साथ भी मित्रतापूर्ण रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह विक्रम वर्मा के यहां शादी में शामिल हुए थे और सुंदरलाल पटवा के घर दाल-बाफले खाने भी जाते थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में इस तरह के आपसी संबंधों की परंपरा बनी रहनी चाहिए और असहमति को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।
मध्य प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य पर करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है, जबकि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब यह लगभग 23 हजार करोड़ रुपये था। लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी संकेतों में इस योजना को आर्थिक बोझ बता चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब फिलहाल योजना के तहत 1,250 रुपये की किस्त दी जा रही है, तो इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने पर स्थिति क्या होगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव देखेंगे।
