मिली जानकारी के अनुसार मुनि महाराज 20 मई को महाराष्ट्र के शिरपुर से मध्य प्रदेश में प्रवेश कर बड़वानी जिले के गवाड़ी पहुंचे थे। इसके बाद वे सेंधवा और जुलवानिया क्षेत्र की ओर विहार करते हुए आगे बढ़े। इसी दौरान मार्ग की गलत जानकारी और व्यवस्था में कमी के कारण वे दिशा भटक गए।
रात के समय सुरक्षित स्थान न मिलने पर उन्होंने एक ढाबे के पास बगीचे में विश्राम किया, लेकिन अगले दिन सुबह से ही तेज धूप और लू में उनका कठिन विहार जारी रहा। लगातार बढ़ती गर्मी और जल–आहार की अनुपलब्धता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
स्थानीय लोगों और जैन समाज के सदस्यों ने जब मुनि महाराज के लापता होने की सूचना पाई तो तलाश शुरू की। इसके बाद पुलिस भी सक्रिय हुई और जुलवानिया व आसपास के थाना क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया गया। करीब 6 घंटे की तलाश के बाद मुनि महाराज ठान फाटे के पास एक पुल के नीचे बैठे मिले।
मुनि महाराज के मिलने पर उपस्थित समाजजनों और पुलिस टीम ने राहत की सांस ली। उन्हें तुरंत पेड़ की छांव में बैठाकर जल और आहार कराया गया। इस दृश्य को देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
स्थानीय समाजजनों ने कहा कि रास्तों की सही जानकारी और विहार व्यवस्था की कमी के कारण यह स्थिति बनी। अब जैन समाज की ओर से इस तरह के मामलों के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने की बात कही जा रही है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर विहार करने वाले मुनियों को भविष्य में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
