साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि किसी आश्रम में रहने वाले सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो ऐसे स्थान पर अपने बच्चों और परिवार को भेजने को लेकर लोगों को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर आश्रम को गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन जब किसी जगह की सुरक्षा को लेकर मन में दुविधा हो तो ऐसी स्थिति में वहां जाने से बचना भी एक विकल्प हो सकता है।
उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्हें सुरक्षित रहना है तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक आस्था के लिए किसी आश्रम में लंबे समय तक रुकना जरूरी नहीं है। लोग मंदिर में दर्शन करें और इसके बाद अपने घर लौट सकते हैं।
साध्वी ने आश्रमों की व्यवस्था और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्रम की राजनीति और विवादों में पड़ने के बजाय अपनी धार्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने आश्रम बनाए हैं अगर वे ही वहां की पूरी व्यवस्था को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर की रात श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम पर न आएं। अगर किसी महिला को अकेले आना पड़े तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा था कि मंदिर परिसर और निर्धारित हॉल के अलावा दूसरी जगहों पर जाने से बचें। उन्होंने बताया था कि बागेश्वर धाम के करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उनके मुताबिक वह मंदिर और हॉल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन पूरे क्षेत्र को लेकर ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम में लंबे समय तक रुकने से बचने और अपने सामान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने की अपील भी की थी। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आने वाली कुछ घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना के कारण बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।
धीरेंद्र शास्त्री की अपील और साध्वी हर्षानंद की प्रतिक्रिया के बीच मुख्य मुद्दा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सामने आया है। दोनों बयानों में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की बात कही गई है हालांकि साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में जाने को लेकर व्यापक सवाल उठाए हैं।
ऐसे मामलों में किसी भी घटना या आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल दोनों संतों की ओर से सामने आए बयानों ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना महत्वपूर्ण सावधानी मानी जा सकती है।
