पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि 3 सितंबर 2026 के राउंड-2 नोटिस में सीट छोड़ने पर 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी का प्रावधान किया गया। उनके अनुसार यह व्यवस्था पहले जारी की गई रूल बुक के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि रूल बुक में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने की स्थिति में केवल प्रवेश शुल्क देय होने की जानकारी दी गई थी। विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।
पटवारी ने कहा कि उसी समय ऑल इंडिया एमसीसी सहित अन्य राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रियाएं भी चल रही थीं। एमसीसी के राउंड-2 सीट आवंटन का कार्यक्रम 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने फ्री एग्जिट की अंतिम तारीख 3 और 4 सितंबर निर्धारित कर दी थी।
उनके अनुसार इस समय-सीमा के कारण विद्यार्थियों को एमसीसी के राउंड-2 परिणाम और सीट अपग्रेड होने की संभावनाओं की जानकारी मिले बिना ही मध्य प्रदेश में मिली सीट को छोड़ने या उसे बनाए रखने का अंतिम निर्णय लेना पड़ा। पटवारी ने इसे विद्यार्थियों के लिए परेशानी वाली स्थिति बताते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों की स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।
पटवारी ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी अन्य काउंसलिंग व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। उनके अनुसार एमसीसी की व्यवस्था में अधिकतम 10 हजार रुपये तक का नुकसान होता है। उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग के पहले राउंड से ही सभी नियम स्पष्ट रूप से विद्यार्थियों के सामने रखे जाने चाहिए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके बीच में नियमों में बदलाव विद्यार्थियों के लिए परेशानी पैदा करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि NEET UG की पुनः परीक्षा और काउंसलिंग में हुई देरी से विद्यार्थी पहले ही प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सीट छोड़ने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला प्रावधान उनके लिए आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को वापस लेने के साथ इसे स्थगित किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2026 की रूल बुक में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों की देयता केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित रखी जानी चाहिए।
उन्होंने पहले से वसूली गई अतिरिक्त राशि विद्यार्थियों को वापस करने की मांग भी की। इसके अलावा राउंड-2 की प्रक्रिया पूरी होने से पहले आवंटित सीट छोड़ने के लिए विद्यार्थियों को उचित समय-सीमा उपलब्ध कराने की बात कही।
पटवारी ने भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव नहीं करने की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उनका कहना है कि काउंसलिंग से जुड़े सभी नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी उपलब्ध विकल्पों और अलग-अलग काउंसलिंग के परिणामों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकें।
