पीड़ित निर्मल नवलानी गोपाल कॉलोनी के निवासी हैं और दवा व्यवसाय से जुड़े हैं। उन्होंने विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म की सदस्यता ले रखी थी। चार जून को उन्होंने जियो हॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन बंद कराने के लिए गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजा। सर्च में मिले नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताया और सदस्यता बंद कराने की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया।
बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर 5 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा। व्यापारी ने अपने गूगल पे के माध्यम से यह राशि भेज दी। इसके कुछ ही समय बाद उनका मोबाइल असामान्य तरीके से काम करने लगा और स्क्रीन बंद हो गई। जब मोबाइल दोबारा चालू किया तो बैंक खाते से लगातार रकम निकलने के संदेश आने लगे।
सबसे पहले उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 8 हजार और फिर 50 हजार रुपए निकाल लिए गए। इसके बाद उनकी पत्नी शारदा के खाते से भी 20 हजार और 30 हजार रुपए के दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर दिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 8 हजार रुपए साइबर ठगों के खाते में पहुंच गए।
ठगी का अहसास होते ही व्यापारी ने तुरंत बैंक से संपर्क कर दोनों खातों को फ्रीज कराया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में मामले को जूनी इंदौर थाने भेजा गया जहां पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। जांच एजेंसियां बैंक खातों ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि गूगल पर दिखाई देने वाला हर कस्टमर केयर नंबर असली नहीं होता। साइबर अपराधी फर्जी नंबर और नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। किसी भी सेवा से जुड़ी सहायता लेने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही कस्टमर सपोर्ट नंबर की पुष्टि करनी चाहिए। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड करने बैंक विवरण साझा करने या छोटी से छोटी राशि ट्रांसफर करने से भी बचना चाहिए क्योंकि यही साइबर ठगी की शुरुआत बन सकती है।
