प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि खेत में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघिन की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार ने बताया कि बाघिन का शव सोमवार शाम जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर कागवान इलाके में किसान के खेत से बरामद किया गया। शुरुआती जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बिजली का झटका लगने की आशंका सामने आई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
घटना के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों की टीम मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने में लगी रही।
वन विभाग के अनुसार, बाघिन के शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के तहत कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का नियमानुसार निस्तारण कर दिया गया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और खेत में मौजूद बिजली के तार की इसमें क्या भूमिका रही।
मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट कहा जाता है। साल 2022 की राष्ट्रीय बाघ जनगणना में राज्य में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या थी। प्रदेश में वर्तमान में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं। ऐसे में किसी बाघ या बाघिन की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार बिछाए जाने से वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती है। रायसेन की इस घटना में भी बिजली के तार से करंट लगने की आशंका सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क है। हालांकि, बाघिन की मौत का सटीक कारण जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
